Sunday, June 27, 2010

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ab aaj kal mein G SURGIWEAR MEIN kaam kr rha hoon.abhi kuch din pehle mera mobile exam center se chori ho gya. meri smajh mein nhi aata log ye kaam kyoun karte hein.barish shahjahanpur ko chod kr her jagah ho rhi hein , mujhe lagta hein yhan pr paapi log jyada rahte hein.

Thursday, May 21, 2009

HELLLO
AAJ MEIN BAHUT DINO KE BAAD LIKH RAHU HOON
KUCH DINO KE BAAD MERA INTERVIEW HEIN .AUR MEIN BAHUT HI TENSION MEIN HOON

Wednesday, December 24, 2008

hi

Today i am missing my friends.

Thursday, December 18, 2008

मैं मधुबाला मधुशाला की,मैं मधुशाला की मधुबाला!मैं मधु-विक्रेता को प्यारी,मधु के धट मुझ पर बलिहारी,प्यालों की मैं सुषमा सारी,मेरा रुख देखा करती हैमधु-प्यासे नयनों की माला।मैं मधुशाला की मधुबाला!
2
इस नीले अंचल की छायामें जग-ज्वाला का झुलसायाआकर शीतल करता काया,मधु-मरहम का मैं लेपन करअच्छा करती उर का छाला।मैं मधुशाला की मधुबाला!
3
मधुघट ले जब करती नर्तन,मेरे नुपुर की छम-छननमें लय होता जग का क्रंदन,झूमा करता मानव जीवनका क्षण-क्षण बनकर मतवाला।मैं मधुशाला की मधुबाला!
4
मैं इस आंगन की आकर्षण,मधु से सिंचित मेरी चितवन,मेरी वाणी में मधु के कण,मदमत्त बनाया मैं करती,यश लूटा करती मधुशाला।मैं मधुशाला की मधुबाला!
5
था एक समय, थी मधुशाला,था मिट्टी का घट, था प्याला,थी, किन्तु, नहीं साकीबाला,था बैठा ठाला विक्रेतादे बंद कपाटों पर ताला।मैं मधुशाला की मधुबाला!
6
तब इस घर में था तम छाया,था भय छाया, था भ्रम छाया,था मातम छाया, गम छाया,ऊषा का दीप लिये सर पर,मैं आ‌ई करती उजियाला।मैं मधुशाला की मधुबाला!
7
सोने सी मधुशाला चमकी,माणित दॿयॿति से मदिरा दमकी,मधुगंध दिशा‌ओं में चमकी,चल पड़ा लिये कर में प्यालाप्रत्येक सुरा पीनेवाला।मैं मधुशाला की मधुबाला!
8
थे मदिरा के मृत-मूक घड़े,थे मूर्ति सदृश मधुपात्र खड़े,थे जड़वत प्याले भूमि पड़े,जादू के हाथों से छूकरमैंने इनमें जीवन डाला।मैं मधुशाला की मधुबाला!
9
मझको छूकर मधुघट छलके,प्याले मधु पीने को ललके ,मालिक जागा मलकर पलकें,अंगड़ा‌ई लेकर उठ बैठीचिर सुप्त विमूर्छित मधुशाला।मैं मधुशाला की मधुबाला!
10
प्यासे आि, मैंने आिका,वातायन से मैंने िािका,पीनेवालों का दल बहका,उत्कंठित स्वर से बोल उठा,‘कर दे पागल, भर दे प्याला!’मैं मधुशाला की मधुबाला!
11
खॿल द्वार मदिरालय के,नारे लगते मेरी जय के,मिटे चिन्ह चिंता भय के,हर ओर मचा है शोर यही,‘ला-ला मदिरा ला-ला’!,मैं मधुशाला की मधुबाला!
12
हर एक तृप्ति का दास यहां,पर एक बात है खास यहां,पीने से बढ़ती प्यास यहां,सौभाग्य मगर मेरा देखो,देने से बढ़ती है हाला!मैं मधुशाला की मधुबाला!
13
चाहे जितना मैं दूं हाला,चाहे जितना तू पी प्याला,चाहे जितना बन मतवाला,सुन, भेद बताती हूँ अंतिम,यह शांत नही होगी ज्वाला।मैं मधुशाला की मधुबाला!
14
मधु कौन यहां पीने आता,है किसका प्यालों से नाता,जग देख मुझे है मदमाता,जिसके चिर तंद्रिल नयनों परतनती मैं स्वपनों का जाला।मैं मधुशाला की मधुबाला!
15
यह स्वप्न-विनिर्मित मधुशाला,यह स्वप्न रचित मधु का प्याला,स्वप्निल तृष्णा, स्वप्निल हाला,स्वप्नों की दुनिया में भूला फिरता मानव भोलाभाला।मैं मधुशाला की मधुबाला!

Wednesday, December 17, 2008

मेरे हम-नफ़स, मेरे हम-नवा, मुझे दोस्त बनके दग़ा न देमैं हूँ दर्द-ए-इश्क़ से जाँवलब, मुझे ज़िन्दगी की दुआ न दे
मेरे दाग़-ए-दिल से है रौशनी, उसी रौशनी से है ज़िन्दगीमुझे डर है अये मेरे चारागर, ये चराग़ तू ही बुझा न दे
मुझे छोड़ दे मेरे हाल पर, तेरा क्या भरोसा है चारागरये तेरी नवाज़िश-ए-मुख़्तसर, मेरा दर्द और बढ़ा न दे
मेरा अज़्म इतना बलंद है के पराये शोलों का डर नहींमुझे ख़ौफ़ आतिश-ए-गुल से है, ये कहीं चमन को जला न दे
वो उठे हैं लेके होम-ओ-सुबू, अरे ओ 'शकील' कहाँ है तू तेरा जाम लेने को बज़्म में कोई और हाथ बढ़ा न दे

Sunday, December 14, 2008

hi
now i am doing the prepration of my "o"level examination so i can not write the blog

Monday, November 17, 2008